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न सांसद, न मंत्री फिर भी मिला बंगला! केजरीवाल को मिला नया सरकारी पता

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आखिरकार एक साल की लंबी प्रतीक्षा और दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार ने लोधी एस्टेट में टाइप-VII श्रेणी का बंगला आवंटित कर दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को आवंटित हुए 95, लोधी एस्टेट के इस भव्य निवास ने केजरीवाल की दिक्कत दूर कर दी है. यह आवंटन राष्ट्रीय पार्टी के संयोजक के तौर पर केजरीवाल के हक को मान्यता देता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया ने राजनीतिक विवादों और न्यायिक हस्तक्षेप को जन्म दिया. केजरीवाल ने सितंबर 2024 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद अक्टूबर में वे अपने आधिकारिक निवास 6, फ्लैगस्टाफ रोड से बाहर निकल आए. तब से वे आप के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के सरकारी बंगले पर रह रहे थे. फ्लैगस्टाफ रोड वाले बंगले के नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा ने आप पर शीश महल बनाने का आरोप लगाया था, जो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बिंदु बना. क्यों मिला बंगला? राष्ट्रीय पार्टी के संयोजक के रूप में केजरीवाल को दिल्ली में सरकारी आवास का अधिकार था, लेकिन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि निदेशालय (डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स) की ओर से देरी के कारण मामला अदालत पहुंच गया. जुलाई 2014 की डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स की नीति स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय पार्टियों के अध्यक्षों या संयोजकों को आवास का प्रावधान करती है, लेकिन प्रकार निर्दिष्ट नहीं है. केजरीवाल के वकील सीनियर एडवोकेट राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्षों को टाइप-VII बंगला मिलता रहा है. उन्होंने कहा कि आज वे मुझे टाइप-VI में नहीं धकेल सकते. क्या उचित है? मुझे स्पष्ट निर्देश चाहिए. मैं कोई चहेता नहीं हूं, बीएसपी की तरह नहीं. लेकिन नीति में निष्पक्षता होनी चाहिए. उनका इशारा बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती की ओर था, जिन्हें 35, लोधी एस्टेट आवंटित किया गया था. मायावती ने मई 2025 में यह बंगला खाली कर दिया, जबकि फरवरी 2024 में 29, लोधी एस्टेट को बीएसपी कार्यालय के रूप में बदल दिया गया था. हाईकोर्ट में चला केस दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की इस देरी पर कड़ी नाराजगी जताई. 16 सितंबर 2025 को जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि आवंटन किसी की मनमानी पर नहीं हो सकता, बल्कि पारदर्शी नीति पर आधारित होना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र से नीति, वर्तमान वेटिंग लिस्ट और आवंटनों का हलफनामा मांगा. 18 सितंबर को सुनवाई के दौरान पता चला कि आप द्वारा सुझाए गए 35, लोधी एस्टेट को जुलाई में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को आवंटित कर दिया गया था. कोर्ट ने इसे “स्वतंत्र प्रणाली” करार दिया और चेतावनी दी कि आवंटन चुनिंदा नहीं हो सकता. 25 सितंबर को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि 10 दिनों में “उचित” आवास आवंटित हो जाएगा. सोमवार को यह वादा पूरा हुआ.यह मामला केवल केजरीवाल की व्यक्तिगत सुविधा का नहीं, बल्कि राजनीतिक आवास नीति की पारदर्शिता का प्रतीक बन गया. विपक्ष ने इसे केंद्र की “राजनीतिक बदले की भावना” बताया, जबकि भाजपा ने आप की “विलासिता” पर सवाल उठाए. आप नेता ने इसे “न्याय की जीत” कहा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं की. लोधी एस्टेट, दिल्ली का प्रतिष्ठित इलाका, जहां टाइप-वीआईआई बंगला सरकारी आवासों की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी है, अब केजरीवाल का नया ठिकाना बनेगा. यह घटना राष्ट्रीय पार्टियों के नेताओं के लिए आवास नीति में सुधार की मांग को तेज कर सकती है.  

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर दांव: UP चीफ से पहले कौन संभालेगा BJP की कमान?

लखनऊ  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रमुख को लेकर भी अटकलों का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि भाजपा यूपी से पहले अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है। फिलहाल, इसपर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अटकलें ये भी हैं कि भाजपा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नया कप्तान नियुक्त कर सकती है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राष्ट्रीय और यूपी अध्यक्ष के लिए विचार विमर्श का दौर पूरा हो गया है। आने वाले दिनों में भाजपा दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक और त्रिपुरा के अध्यक्षों का ऐलान कर सकती है। वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद यूपी भाजपा को नया कप्तान मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी नेतृत्व को फैसला लेना है कि वह ओबीसी चेहरे के साथ जाएगी या ब्राह्मण नेता का चुनाव करेगी। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यूपी अध्यक्ष की घोषणा की जा सकती है। दोनों ही नियुक्तियों के लिए भाजपा पहले RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को विश्वास में लेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के संबंध में 80 से ज्यादा भाजपा नेताओं से सुझाव मांगे गए हैं। इनमें कुछ सक्रिय और कुछ दिग्गज नेता शामिल हैं। फिलहाल, जगत प्रकाश नड्डा भाजपा की कमान संभाल रहे हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के अंदर जारी चर्चाओं में दो नेताओं का नाम सामने आ रहा है, जो बड़े स्तर पर भाजपा में चुनाव की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। साथ ही एक पूर्व मुख्यमंत्री के नाम की भी चर्चा है। सूत्रों ने बताया कि दक्षिण भारतीय राज्य से आने वाले एक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि वह खुद को पद के लिए सक्षम नहीं मानते हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि भाजपा अध्यक्ष 60 साल के आसपास का होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि सरकार और संगठन दो अलग चीजें हैं। सरकार में संघ दखल नहीं देगा, लेकिन संगठन संघ परिवार का हिस्सा है और एक योग्य संगठक की जरूरत है।

भाजपा सांसद मुर्मू पर बंगाल में हमला, पत्थर लगने से हुए लहूलुहान—हमलावर कौन?

जलपाईगुड़ी पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भारतीय जनता पार्टी सांसद खागेन मुर्मू पथराव में घायल हो गए हैं। खास बात है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के बाद भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बंगाल पहुंचा था। पार्टी ने राज्य में सत्तारूढ़ TMC यानी तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाए हैं और कहा है कि राहत कार्य करने पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया जा रहा है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने लिखा, 'बंगाल में टीएमसी का जंगल राज। भाजपा सांसद खगेन मुर्मू एक सम्मानित आदिवासी नेता हैं और वह उत्तर मालदा से दो बार सांसद रहे हैं। जब वह भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के बाद जलपाईगुड़ी के दुआर क्षेत्र में मौजूद नगरकाटा जा रहे थे, तो टीएमसी के गुंडों ने उनपर हमला कर दिया।' उन्होंने लिखा, 'ममता बनर्जी कोलकाता कार्निवल में डांस कर रही हैं, तो वहीं टीएमसी और राज्य प्रशासन गायब है। असल में लोगों की मदद कर रहे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर राहत कार्य करने के लिए हमले किए जा रहे हैं। यह टीएमसी का बंगाल है, जहां क्रूरता का राज है और दया को सजा मिलती है।' उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी में बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री बांटने गए बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू और विधायक डॉ. शंकर घोष पर हमले की खबर है. बीजेपी नेताओं ने इस हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के गुंडों का हाथ होने का आरोप लगाया है. बीजेपी विधायक डॉ. शंकर घोष ने आरोप लगाया कि नागराकाटा में राहत सामग्री बांटने के दौरान भीड़ ने पत्थरबाजी कर दी, जिसमें मालदा उत्तर के सांसद खगेन मुर्मू के सिर पर चोट लगी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. बीजेपी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि हमले के दौरान पुलिस मौजूद थी, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने फोन कर मुर्मू का हालचाल जाना है. सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को घेरा इस घटना के बाद बीजेपी नेताओं ने केंद्र सरकार और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है. बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ममता बनर्जी घबराई हुई हैं. जब उत्तर बंगाल बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी झेल रहा था, तब वह कोलकाता कार्निवाल में सेलिब्रिटीज के साथ नाच रही थीं. जनता ने उनके इस अमानवीय व्यवहार को नापसंद किया है. अब उन्होंने ‘स्पेशल कम्युनिटी’ के गुंडों को बीजेपी सांसदों और विधायकों पर हमला करने के लिए उकसाया है ताकि वे राहत कार्य न कर सकें. सांसद खगेन मुर्मू पर नागराकाटा में बर्बरतापूर्वक हमला किया गया.’ वहीं प्रदीप भंडारी ने इसे ‘टीएमसी का आतंक’ करार देते हुए कहा कि ‘ममता बनर्जी जहां कोलकाता कार्निवाल में व्यस्त थीं, वहीं बीजेपी नेता और कार्यकर्ता राहत पहुंचाने निकले और उन पर हमला कर दिया गया.’ इस हमले के बावजूद बीजपी नेताओं ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत अभियान जारी रखने का संकल्प लिया है. उत्तर बंगाल में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है. यहां अचानक बाढ़ और भूस्खलन से जानमाल का खासा नुकसान हुआ है. उत्तर बंगाल में वर्षा जनित आपदा में 22 लोगों की जान जा चुकी है.

किरेन रिजिजू का हमला: राहुल गांधी ने फिर दिया भारत विरोधी बयान, जानें पूरी बात

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर लटवार किया है। कोलंबिया यात्रा के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर उनकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी पहले ऐसे विपक्षी नेता हैं जो विदेश जाकर देश, इसकी व्यवस्था और लोकतंत्र के विरुद्ध बोले। रिजिजू ने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं, जिससे देश की छवि को ठेस पहुंच सकती है। देश की इज्जत दांव पर लग जाती है न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि मैंने राहुल गांधी के कोलंबिया वाले बयान को सुना। उन्होंने दावा किया कि भारत वैश्विक नेतृत्व नहीं कर सकता। यह बयान पूरी तरह गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व स्थापित किया है। लेकिन हमारे विपक्ष के नेता विदेश में जाकर कहते हैं कि भारत वैश्विक नेता नहीं बन सकता। समस्या तब पैदा होती है जब विदेशी लोग सोचने लगें कि भारत में सभी राहुल गांधी जैसे हैं, इससे तो देश की इज्जत दांव पर लग जाती है। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारे देश में बुद्धिमान लोग, मजबूत नेता और सकारात्मक विचारधारा वाले नागरिक हैं। लेकिन राहुल गांधी के ऐसे बयानों से लोग यह भ्रमित हो सकते हैं कि भारत में ऐसे लोग ही बहुमत में हैं। यह सच्चाई से परे है। संसदीय कार्य मंत्री ने भाजपा की ओर से राहुल के बयानों पर की गई प्रतिक्रिया का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्तिगत वैमनस्य से प्रेरित नहीं, बल्कि विपक्ष के नेता के रूप में उनकी जिम्मेदारी से जुड़ा मुद्दा है। देश या सरकार के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया उन्होंने आगे कहा कि इंदिरा गांधी, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, सुषमा स्वराज और शरद पवार जैसे पूर्व विपक्षी नेताओं ने कभी विदेश में रहते हुए देश या सरकार के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा हमेशा राहुल गांधी की टिप्पणियों पर ही क्यों प्रतिक्रिया देती है, तो रिजिजू ने जवाब दिया कि हमारा उनसे कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। वे विपक्ष के नेता हैं। अगर वे गैर-जिम्मेदाराना बोलते हैं, तो हमें यह स्वीकार्य नहीं लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि इंदिरा गांधी चुनाव हारने के बाद भी विपक्ष की नेता रहीं, लेकिन उन्होंने कभी विदेश में देश के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उसके बाद आडवाणी, वाजपेयी, सुषमा स्वराज या शरद पवार जैसे नेताओं ने भी ऐसा नहीं किया। केंद्रीय मंत्री ने चुनौती देते हुए कहा कि मुझे एक भी विपक्षी नेता का नाम बताइए, जो भारत से बाहर जाकर देश या सरकार के खिलाफ बोला हो। राहुल गांधी पहले ऐसे नेता हैं, जो विदेश यात्रा पर जाकर देश, हमारी प्रणाली और लोकतंत्र पर प्रहार करते हैं। कोलंबिया में क्या बोले थे राहुल गांधी कोलंबिया के ईआईए विश्वविद्यालय में एक आयोजन के दौरान राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि भारत के समक्ष सबसे बड़ी समस्या लोकतंत्र पर हो रहे हमले की है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के पास इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मजबूत क्षमता है, इसलिए मैं देश को लेकर बहुत आशावादी हूं। लेकिन व्यवस्था में कमियां भी हैं, जिन्हें सुधारना जरूरी है। सबसे बड़ा खतरा लोकतंत्र पर चल रहा हमला है। इस दौरान कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक प्रणाली विविधता को बढ़ावा देती है, जो अलग-अलग परंपराओं, रीति-रिवाजों, विचारों और धार्मिक मान्यताओं को फलने-फूलने का मौका प्रदान करती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में लोकतंत्र पर व्यापक प्रहार हो रहा है, जो एक गंभीर जोखिम है। उन्होंने कहा कि भारत में कई धर्म, परंपराएं और भाषाएं हैं। यह देश मूल रूप से इन सभी संस्कृतियों के बीच संवाद का पुल है। विविध विचारों, धर्मों और परंपराओं को जगह देने का सबसे अच्छा माध्यम लोकतंत्र है। आरएसएस और बीजेपी पर हमला उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल इस लोकतांत्रिक व्यवस्था पर व्यापक हमला हो रहा है, जो बड़ा खतरा है। एक अन्य बड़ा जोखिम देश के विभिन्न भागों में विचारधाराओं के बीच पैदा हो रहा तनाव है। 16-17 प्रमुख भाषाओं और अनेक धर्मों वाले देश में इन विविधताओं को पनपने देना और उन्हें उचित स्थान प्रदान करना बेहद जरूरी है। इस दौरान राहुल गांधी ने आरएसएस-भाजपा की विचारधारा पर भी प्रहार किया और कहा कि इसके मूल में 'कायरता' छिपी है। कांग्रेस नेता ने कहा था कि यह भाजपा-आरएसएस का मूल स्वभाव है। अगर विदेश मंत्री के बयान पर ध्यान दें, तो उन्होंने कहा था कि चीन हमसे कहीं ज्यादा ताकतवर है, मैं उनसे कैसे टकरा सकता हूं? इस विचारधारा की जड़ में कायरता ही है। भाजपा ने राहुल गांधी की इन टिप्पणियों पर तीखी आपत्ति जताई और उन्हें 'भारत-विरोधी' करार देते हुए देश का अपमान करने वाला बताया।  

राजनीतिक गलियारों में चर्चा: बिहार चुनाव के बाद बीजेपी में बड़े बदलाव की संभावना

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में आजकल बहुत चर्चा हो रही है। पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल पहले ही बढ़ाया जा चुका है। अब पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि नया अध्यक्ष कब चुना जाएगा और इस महत्वपूर्ण पद पर कौन बैठेगा। उधर बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही होने की संभावना है। हालांकि पहले बीजेपी की तरफ से ऐसे संकेत थे कि बिहार चुनाव से पहले ही नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन अब यह संभव नहीं लग रहा है। दरअसल अब चुनाव आयोग की टीम बिहार में है और आने वाले हफ्ते में चुनाव की घोषणा की उम्मीद है। ऐसे में अब इस पर कोई फैसला मुश्किल लगता है। भारत निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए सीईसी ज्ञानेश कुमार और ईसी डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के नेतृत्व में ईसीआई प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को पटना पहुंच गया है। वहीं, इससे पहले चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा के आगामी आम चुनाव और कुछ राज्यों के उपचुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में तैनात किए जाने वाले सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों के लिए एक ब्रीफिंग का आयोजन किया। बैठक में 287 आईएएस अधिकारी, 58 आईपीएस अधिकारी और आईआरएस, आईआरएएस, आईसीएएस तथा अन्य सेवाओं के 80 अधिकारियों सहित 425 अधिकारियों ने भाग लिया। यह ब्रीफिंग बैठक आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। जेपी नड्डा जनवरी 2020 से हैं अध्यक्ष बीजेपी में इस समय अध्यक्ष पद को लेकर काफी गहमागहमी है। पार्टी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हैं। उनका कार्यकाल पहले ही बढ़ाया जा चुका है। जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बढ़ाया गया था। इस विस्तार ने पार्टी के भीतर कई सवाल खड़े किए थे। अब एक बार फिर से यह सवाल उठ रहा है कि पार्टी अपना नया अध्यक्ष कब चुनेगी। और इस बड़े और महत्वपूर्ण पद पर आखिर किसे मौका मिलेगा। यह फैसला बीजेपी के भविष्य की दिशा तय करेगा। राजनीतिक गलियारों में कई बड़े नेताओं के नाम चल रहे हैं। हर कोई जानना चाहता है कि अगला अध्यक्ष कौन होगा। यह पद बीजेपी में बहुत ताकतवर माना जाता है। इसलिए इस पर सबकी नजर है।

बिहार चुनाव 2025: पारस-चिराग विवाद के बीच CM उम्मीदवार को लेकर नई राजनीति

पटना राजनीति में कब हृदय परिर्वतन हो जाए यह कोई नहीं जानता। ताजा उदाहरण राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस हैं जिनका अपने भतीजा चिराग पासवान के प्रति हृदय परिर्वतन हो गया है। यह सब अचानक नहीं हुआ है। दरअसल एनडीए से विदाई के बाद पारस महागठबंधन में शामिल होने की उम्मीद पाले थे, लेकिन लालू प्रसाद से मेल-मिलाप के बाद भी पारस को महागठबंधन में भाव नहीं मिल रहा। विधानसभा चुनाव सिर पर है। पारस अपने पुत्र यशराज पासवान को चुनावी महासमर में लांच करने की घोषणा कर चुके हैं। वे पुत्र को उसी सुरक्षित सीट अलौली विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाने की मंशा पाले हैं, जहां से वे सात बार चुनाव जीत चुके हैं। यह सीट अभी राजद के कब्जे में है। इस सीट को राजद कतई छोड़ने के मूड में नहीं है। उधर, एनडीए में अलौली सीट पर चिराग पासवान का दावा मजबूत माना जा रहा है। ऐसे में पारस भतीजा चिराग पासवान को खून का रिश्ता होने की दुहाई देते हुए गुणगान में जुट गए हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि चिराग पासवान उनका भतीजा है। वो याेग्य हैं, मेहनती भी। अगर वे मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी होगी। वो मेरा परिवार के सदस्य हैं, मेरा भतीजा भी। चुनाव से पहले पारस के इस बदले सियासी राग ने चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में भी हलचल मचा दी है। पार्टी के प्रवक्ता रंजन सिंह ने पारस के बयान का स्वागत किया और कहा कि हमारे नेता चिराग पासवान को सीएम बनाने संबंधी पशुपति पारस का बयान स्वागत योग्य है। वैसे कहने को तो पारस महागठबंधन के साथ हैं लेकिन अब तक उन्हें महागठबंधन में अधिकारिक इंट्री नहीं हुई है। वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र ने कहा कि महागठबंधन में सीटें पाने के लिए पारस चिराग पासवान को लेकर बयान दे रहे हैं। पारस का बयान महागठबंधन के प्रति प्रेशर पालिटिक्स है।

बिहार की राजनीति पर शिवराज का आरोप: लालू परिवार के खिलाफ सख्त बयान, विपक्ष पर जमकर बरसे

पटना  बिहार की राजनीति को लेकर वरिष्ठ बीजेपी नेता और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने पटना में कहा कि आज बिहार में महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम हो रहा है लेकिन विपक्ष इसे पचाने में असमर्थ है और कुंठा में डूबा हुआ है. कुर्सी के लिए बेटी का तिरस्कार: शिवराज शिवराज सिंह चौहान ने परिवारवाद और कुर्सीवाद को विपक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी बताया है. उन्होंने कहा कि जिन दलों ने हमेशा परिवार को ही राजनीति का आधार बनाया, वो अब जनता के बीच अपनी प्रासंगिकता खोते जा रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसते हुए कहा, 'परिवारवाद और कुर्सीवाद में इस कदर उलझ गए हैं कि किडनी देने वाली बेटी तक का तिरस्कार किया जा रहा है, आज विपक्ष के भीतर असली लड़ाई इस बात की है कि कौन नेता होगा और कौन उत्तराधिकारी, एक नेता यहां है, तो दूसरा विदेश में घूम रहा है.' शिवराज ने राहुल गांधी पर भी साधा निशाना उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राहुल जी अपनी कुंठा विदेश में निकालते हैं और वहां जाकर देश को बदनाम करने का पाप करते हैं. चौहान ने व्यंग्य करते हुए कहा कि विपक्ष की हालत 'सूत न कपास, दुल्हन में लट्ठमलट्ठा' जैसी हो गई है. भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार समेत पूरे देश में गरीबों और वंचितों को योजनाओं का लाभ सीधे मिल रहा है. महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिल रही है, किसानों को सहायता मिल रही है, युवाओं के लिए रोजगार और अवसर पैदा हो रहे हैं. यही वजह है कि जनता भाजपा और एनडीए पर विश्वास कर रही है और विपक्ष बौखलाहट में केवल नकारात्मक राजनीति कर रहा है. मखाना महोत्सव में हिस्सा लेने बिहार पहुंचे हैं शिवराज शिवराज सिंह चौहान पटना में आयोजित मखाना महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को बिहार गए हैं. देश भर में बिहार सबसे बड़ा मखाना उत्पादक राज्य है. इसको लेकर उन्होंने कहा, मखाना बोर्ड उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग से लेकर मार्केटिंग और निर्यात तक पूरी ताकत से काम करेगा, मखाना अब सिर्फ बिहार की पहचान नहीं, बल्कि निवेश और रोजगार का नया इंजन बनेगा. कृषि मंत्री ने कहा, हमारा संकल्प है, बिहार का मखाना वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाए और हर कोने तक पहुंचे.

निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर वार, कहा- इमर्जेंसी में बुजुर्गों तक को जेल में ठूंसा गया था

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लद्दाख लद्दाख में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का विरोध करने पर कांग्रेस को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने खूब सुनाया है। दुबे ने कहा कि कांग्रेस शायद आपातकाल के समय को भूल गई है जब इंदिरा गांधी की सरकार ने विजय राजे सिंधिया और आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल भीम सेन सचर को गिरफ्तार करवा लिया था। उन्होंने कहा, कांग्रस जिस संविधान का हवाला दे रही है, वह 1975 में कहा चला गया था। उन्होंने कहा, बीजेपी की संस्थापक सदस्य राज माता सिंधिया को गिरफ्तार कर लिया गया। आयकर विभाग ने छापे डाले। गायत्री देवी और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया। उन्हें ऐसी कालकोठरी में डाला गया जिसमें बाथरूम तक नहीं था और आप महिलासशक्तीकरण की बात करते हैं। निशिकांत दुबे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछ विदेशी ताकतों का हाथ था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग पूरी कर दी है। उन्होंने कहा, आज आप लद्दाख की बात करते हैं। लद्दाख में लोग मारे गए। पहले वही वांगचुक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग करते थे और विदेशी ताकत के शामिल होने के बाद वह पूर्ण राज्य की मांग करने लगे। कांग्रेस ने पिछले 30 साल में कुछ नहीं किया लेकिन मोदी जी की सरकार ने लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया। निशिकांत दुबे ने कहा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल 82 साल के सचर को घसीटकर जेल में बंद कर दिया गया था। आप लोकतंत्र की बात कैसे कर सकते हैं। कांग्रेस को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। इससे पहले निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिा पर कहा था कि कांग्रेस लद्दाख के मामले में घड़ियाली आंसूबहा रही है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र से मांग की है कि वह लद्दाख के लोगों से बात करे और लद्दाख में लोगों को डराना धमकाना बंद करे। उन्होंने हाल में हुई हिंसा को लेकर न्यायिक जांच की मांग की है। राहुल गांधी ने कहा था कि लद्दाख में मारा गया एक शख्स जवान के परिवार से था। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक बहादुर और देशभक्त की जान ले ली क्योंकि वह लद्दाख के अधिकार की मांग कर रहा था। उसके पिता का सवाल है कि क्या देश की सेवा करने का यही इनाम है? बता दें कि सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है और जोधपुर जेल में रखा गया है।  

RSS की सराहना पर संजय दत्त को कांग्रेस नेता की फटकार – ‘नायक नहीं, नालायक है तू’

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मुंबई  बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100वीं वर्षगांठ पर साझा किए गए एक वीडियो ने सियासी हलचल मचा दी है। उस वीडियो में संजय दत्त आरएसएस की तारीफ करते हुए 100वीं वर्षगांठ पर शुभकामना दे रहे हैं। कांग्रेस को यह पसंद नहीं आया और देश की सबसे पुरानी पार्टी ने संजय दत्त को नालायक तक कह दिया। संजय दत्त ने 2 अक्टूबर के दिन अपने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, “संघ हमेशा देश के साथ खड़ा रहा है, खासकर संकट और मुश्किल समय में।” इस बयान के बाद से ही सोशल मीडिया पर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कांग्रेस का तीखा हमला कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने संजय दत्त पर बेहद कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “नायक नहीं, खलनायक है तू। अपने पिता का नालायक है तू।” आपको बता दें कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे। वह सांसद भी रहे। वहीं, उनकी बहन प्रिया दत्त भी कांग्रेस से जुड़ी हैं। संजय दत्त ने दोनों की विचारधारा के विपरीत जाकर RSS की प्रशंसा की है। सुरेंद्र राजपूत के बयान पर अब तक संजय दत्त की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आपको बता दें कि संजय दत्त पहले कई विवादों में घिरे थे। 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में उन्हें गैरकानूनी हथियार रखने के आरोप में TADA कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में वे TADA के आरोपों से बरी हुए, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए गए और उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी।

BJP का नया प्लान: बिहार में लागू होगा गुजरात मॉडल, कई नेताओं की टिकट पर संकट

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पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है. दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एंटी इनकंबेंसी से निबटना है. जनता के बीच लंबे समय से जीत रहे विधायकों और मंत्रियों को लेकर बेहद नाराजगी है. इस चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए भाजपा बिहार में गुजरात मॉडल लागू करने जा रही है. गुजरात की तरह बिहार में भी मौजूदा कई मंत्रियों और विधायकों का टिकट काटा जायेगा. ऐसे करीब 30 विधायकों की सूची तैयार की गयी है, जिन्हें पार्टी इस बार बेटिकट कर सकती है. वोटरों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा का प्रदर्शन संतोषप्रद रहा था. नीतीश कुमार की कम सीटें आने के बाद भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए पांचवीं बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहा है. भाजपा के पास अभी 80 विधायक हैं, जिनमें 22 मंत्री हैं. कई सीटों पर इस बार स्थानीय विधायक के प्रति विरोधी लहर पहले के मुकाबले मजबूत है. भाजपा ऐसे विधायकों की जगह नये चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है. वैसे जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए ऐसा करना आसान नहीं है. बिहार में भाजपा एक वरीय नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की योजनाओं के कारण जनता में पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी नहीं है, लेकिन स्थानीय विधायकों से जनता नाराज है. मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है. गुजरात की तरह कई कद्दावर नेता होंगे बेटिकट पार्टी का जनाधार बढ़ाने और एंटी इनकंबेंसी को साधने के लिए अमित शाह लगातार बिहार की टीम के साथ विचार मंथन कर रहे हैं. उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले एक फार्मूले पर काम किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा बिहार में भी गुजरात मॉडल लागू कर सकती है. भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में इसपर गंभीरता से विचार-विर्मश हुआ है. भाजपा ने 2022 में गुजरात चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव किया था. उसी तर्ज पर बिहार में भी एक व्यापक फेरबदल किया जा सकता है. लगातार सातवीं बार गुजरात जीतने के लिए भाजपा ने पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया था. साथ ही अपने 108 मौजूदा विधायकों में से 45 का टिकट काट दिया था, जिनमें कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल थे. बिहार में भी भाजपा इसी रास्ते सत्ता में वापसी का प्लान बना रही है.