NGT Order: भोज वेटलैंड से एक माह में अतिक्रमण हटाओ, निगम को निर्देश
NGT Order Remove encroachment from Bhoj Wetland within a month भोपाल। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय खंडपीठ ने भोज वेटलैंड के आसपास जारी अतिक्रमण और पर्यावरणीय उल्लंघनों पर कड़ा रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने भोपाल नगर निगम (बीएमसी) और भोपाल कलेक्टर को एक माह के भीतर झील क्षेत्र से सभी अवैध निर्माण हटाए जाने का सीधा निर्देश दिया है।पर्यावरणविद राशिद नूर खान द्वारा दायर मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान, एनजीटी ने गंभीर चिंता व्यक्त की कि बार-बार आदेशों के बावजूद वेटलैंड में प्रदूषण और अतिक्रमण जारी है। कड़ी आलोचना खंडपीठ ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र की सुरक्षा में सरकार की लंबी निष्क्रियता की तीव्र आलोचना की। एनजीटी ने ‘पब्लिक ट्रस्ट’ के सिद्धांत पर जोर दिया, जिसके तहत प्राकृतिक संसाधन राज्य द्वारा सार्वजनिक हित के लिए ट्रस्टी के रूप में रखे जाते हैं और उनका उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया जा सकता। पीठ ने सख्त लहजे में टिप्पणी की, “कानून के रक्षकों को कानून तोड़ने वाला नहीं बनना चाहिए।” 38 अतिक्रमणकारी चिह्नित बीएमसी ने न्यायाधिकरण को बताया कि 38 अतिक्रमणकारियों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन सुनवाई के अवसर के बाद आगे की कार्रवाई लंबित है। एनजीटी ने इस धीमी प्रगति पर निराशा व्यक्त की और याद दिलाया कि यह मामला 2020 से विचाराधीन है। इकोलॉजिकल स्टडी एनजीटी ने बीएमसी, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और वन विभाग को मिलकर भोज वेटलैंड का पारिस्थितिक अध्ययन (Ecological Study) कराने का भी निर्देश दिया है। इस अध्ययन में झील की वर्तमान पारिस्थितिक स्थिति का आकलन होगा। इसके अलावा, बेसलाइन डेटा स्थापित करने के लिए इस सर्दी में पक्षी जनगणना (Bird Census) भी कराई जाएगी।न्यायाधिकरण ने भोपाल कलेक्टर को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने और आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर, 2025 को होगी।