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Aastha Pandey

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लेंसकार्ट स्टोर ड्रेस कोड विवाद, तिलक मुद्दे पर बवाल बढ़ा

Lencekart

चश्मा बनाने वाली कंपनी Lenskart एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला कथित ड्रेस कोड को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है, जिसने अब सियासी रंग ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बीजेपी नेता नाजिया इलाही खान अपने समर्थकों के साथ मुंबई के अंधेरी स्थित एक लेंसकार्ट स्टोर में पहुंचकर कर्मचारियों से तीखी बहस करती नजर आ रही हैं। वीडियो में वह स्टाफ से तिलक और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों पर कथित रोक को लेकर सवाल करती दिखती हैं।

ड्रेस कोड विवाद ने कैसे पकड़ा तूल

मुंबई के अंधेरी इलाके में लेंसकार्ट स्टोर में एक विवाद तेजी से सामने आया।यह विवाद कथित ड्रेस कोड और धार्मिक प्रतीकों पर रोक को लेकर शुरू हुआ।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस मुद्दे को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।वीडियो में बीजेपी नेता नाजिया इलाही खान स्टोर में बहस करती नजर आईं।उनके साथ कई समर्थक भी मौजूद थे और माहौल काफी गरम हो गया।नेता ने आरोप लगाया कि स्टाफ को तिलक और बिंदी लगाने से रोका जाता है। यह आरोप सामने आते ही मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा था।

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स्टोर में क्या हुआ, कैसे बढ़ा विवाद

वीडियो के अनुसार नेता अपने समर्थकों के साथ स्टोर के अंदर पहुंची थीं।
उन्होंने कर्मचारियों से सीधे सवाल पूछे और ड्रेस कोड पर जवाब मांगा।
इस दौरान कुछ समर्थकों ने कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा।
स्टोर के अंदर धार्मिक नारे भी लगाए गए जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हुआ।
फ्लोर मैनेजर से भी पूछा गया कि क्या धार्मिक पहचान पर कोई रोक है।
एक कर्मचारी ने दावा किया कि ट्रेनिंग के दौरान कुछ चीजों से मना किया गया था।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी है।

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कंपनी की सफाई और नया बयान

विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट कंपनी की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई।
कंपनी के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया।
उन्होंने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और अब लागू नहीं है।
कंपनी ने बताया कि नया स्टाइल गाइड सभी कर्मचारियों को स्वतंत्रता देता है।
इस गाइड में तिलक, बिंदी, हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई है।
कंपनी ने कहा कि वह सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है।
साथ ही यह भी भरोसा दिलाया गया कि किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा।

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कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता की बहस

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक स्टोर तक सीमित नहीं रह गया है।
इस घटना ने पूरे देश में कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता की बहस छेड़ दी है।
कई लोग इसे कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा मान रहे हैं।
वहीं कुछ लोग इसे अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप भी बता रहे हैं।
कॉर्पोरेट कंपनियों में ड्रेस कोड और व्यक्तिगत आस्था का संतुलन जरूरी होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि स्पष्ट और पारदर्शी नीतियां ही विवाद को रोक सकती हैं।
इस मामले ने कंपनियों को अपनी नीतियों की समीक्षा करने का संकेत दिया है।

सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
कुछ लोगों ने कंपनी पर सवाल उठाए और जांच की मांग की है।
वहीं कुछ यूजर्स ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मामला बताया है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपने-अपने बयान जारी किए हैं।
वीडियो के वायरल होने से मामला और तेजी से लोगों तक पहुंचा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया आज किसी भी मुद्दे को बड़ा बना सकता है।
इसलिए ऐसे मामलों में तथ्य और सत्यता की जांच बेहद जरूरी होती है।

FAQs


1. लेंसकार्ट स्टोर ड्रेस कोड विवाद क्या है
यह विवाद कर्मचारियों के ड्रेस कोड में धार्मिक प्रतीकों पर कथित रोक से जुड़ा है।
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि तिलक और बिंदी लगाने से रोका जाता है।
हालांकि कंपनी ने इन आरोपों को गलत बताते हुए नई नीति की जानकारी दी है।

2. क्या लेंसकार्ट कर्मचारियों को तिलक लगाने की अनुमति देता है
कंपनी के अनुसार नया स्टाइल गाइड धार्मिक प्रतीकों की पूरी अनुमति देता है।
इसमें तिलक, बिंदी, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों को शामिल किया गया है।
कंपनी का कहना है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती है।

3. यह विवाद इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से यह मामला तेजी से फैल गया।
राजनीतिक जुड़ाव और धार्मिक भावनाओं के कारण यह संवेदनशील बन गया।
इससे कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता की बहस भी शुरू हो गई है।

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