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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z प्रदर्शन पर जताई अपनी राय, बोले- नीतियों का निर्धारण अलग ढंग से होता है

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नई दिल्ली  विजयादशमी के कार्यक्रम में RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को पड़ोसी देशों में हुईं अशांति की घटनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि जब सरकार लोगों और उनकी परेशानियों से दूर रहती है, तो उसके खिलाफ प्रदर्शन होते हैं। हालांकि, उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों को गलत बताया है और कहा है कि इस तरीके से कभी किसी का फायदा नहीं हुआ। हाल ही में नेपाल में Gen Z आंदोलन हुआ, जिसमें युवाओं ने सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। भागवत ने कहा, 'श्रीलंका में, बाद में बांग्लादेश में, बाद में नेपाल में। हमारे पड़ोसी देशों में हमने इसका अनुभव किया है। अब कभी कभी हो जाता है। प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवेदनशील नहीं रहता। उनकी जनता की अवस्थाओं को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनती, तो असंतोष रहता है। परंतु उस असंतोष को इस प्रकार व्यक्त होना, किसी के लाभ की बात नहीं है।' उन्होंने कहा, '…अगर हम अभी तक का इतिहास देखेंगे तो जब से उथल पुथल वाली तथाकथित क्रांतियां आई हैं। किसी क्रांति ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं किया। राजा के खिलाफ फ्रांस की राज्य क्रांति हुई, उसकी परिणाम क्या हुआ? नेपोलियन बादशाह बन गया। वही राज्यतंत्र कायम है। इतनी सारी तथाकथित साम्यवादी क्रांतियां हुईं, सभी साम्यवादी देश आज पूंजीवादी तंत्र पर चल रहे हैं।' संघ प्रमुख ने कहा कि अगर देश में स्थिति खराब होती है, तो बाहर की ताकतें हावी होने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे हिंसक प्रदर्शनों से उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि अराजकता की स्थिति में देश की बाहर की ताकतों को अपने खेल खेलने का मौका मिलता है। इसलिए हमारे पड़ोसी देशों में जो उथल पुथल हो रही है। ये हमारे ही जैसे हैं, ये हमसे दूर नहीं हैं। ये हमारे अपने है। उनमें इस प्रकार की अस्थिरता होना, वह आत्मीयता के संबंध के चलते चिंता का विषय है।' इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।  

PoK में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना का कहर, 12 नागरिकों की जान गई

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इस्लामाबाद  पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बीते तीन दिनों से जारी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो उठे हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे। मारे गए नागरिकों में पांच मुजफ्फराबाद, पांच धीरकोट और दो डडियाल के बताए जा रहे हैं। इस दौरान झड़प में कम से कम तीन पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं। प्रदर्शन की शुरुआत सरकार की मूलभूत मांगें पूरी न करने से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि क्षेत्र में लगातार शोषण और संसाधनों की लूट हो रही है, जबकि बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। हिंसा में घायल हुए अधिकांश लोगों को गोलियों से चोटें आई हैं। कई अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन PoK में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनविरोध है, जिसने पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अशांत क्षेत्र में जनजीवन को ठप कर दिया है। इस आंदोलन के केंद्र में पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित पीओके की 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग है। 29 सितंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से बाजार, दुकानें और स्थानीय व्यवसाय बंद हैं। मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद हैं। इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।  

भारत के खिलाफ तैयार हो रहा वैश्विक गठजोड़? असल वजह क्या है

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नई दिल्ली  रूसी तेल की खरीद को लेकर 7 देशों के समूह जी7 ने बड़े ऐक्शन की तैयारी की है। खबर है कि यह समूह उन देशों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, जो रूस से तेल खरीद को बढ़ा रहे हैं। खास बात है कि भारत और चीन रूसी तेल के बड़े खरीददार हैं। वहीं, भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि उसे अमेरिका और यूरोपीय संघ निशाना बना रहे हैं। बुधवार को जी7 ने कहा कि रूस पर दबाव बनाने के लिए साझा कदम उठाए जाएंगे। समूह के वित्त मंत्री ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण के कारण रूस के राजस्व को कम करने की कोशिशें जारी हैं। सदस्य देशों की बैठक के दौरान टैरिफ और इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट बैन जैसे व्यापार संबंधी उपायों पर भी चर्चा की गई थी। साझा बयान के अनुसार, 'हम उनको निशाना बनाएंगे, जो यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूसी तेल खरीद को बढ़ाना जारी रखे हुए हैं।' ट्रंप ने की थी पहल सितंबर में ही अमेरिका ने जी7 देशों से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने का अनुरोध किया है। अमेरिका ने जोर देकर कहा कि केवल एकीकृत प्रयास से ही मॉस्को की युद्ध मशीन को धन मुहैया कराने वाले स्रोत को बंद किया जा सकता है। अमेरिका ने यह भी कहा कि ऐसा करके ही रूस को 'बेवकूफी भरी हत्या' को रोकने के लिए पर्याप्त दबाव बनाया जा सकता है। जी7, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन सहित समृद्ध, औद्योगिक देशों का एक अंतर-सरकारी समूह है। कनाडा इस वर्ष जी-7 की अध्यक्षता का प्रमुख है। चीन पर नहीं लगाया ज्यादा शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। जबकि, चीन के मामले में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत पर है। ट्रंप ने भारत के खिलाफ पहले 25 फीसदी शुल्क का ऐलान किया था और रूसी तेल की खरीद को लेकर जुर्माना भी लगाया था। बाद में उन्होंने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा की। वह व्यक्तिगत रूप से भी रूसी तेल को लेकर भारत पर निशाना साध चुके हैं।  

संयुक्त राष्ट्र में भिड़ंत: पाकिस्तान के भाषण पर भारत के मोहम्मद हुसैन का जोरदार हमला

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वाशिंगटन  भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान को सख्त लहजे में आड़े हाथों लिया और जमकर फटकार लगाई है। भारतीय राजदूत मोहम्मद हुसैन ने बुधवार को जिनेवा में हुई 60वें सत्र की 34वीं बैठक में कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान जैसे देश को मानवाधिकारों पर दूसरों को भाषण देने का साहस होता है, जबकि खुद उसके यहां अल्पसंख्यकों का लगातार दमन हो रहा है। हुसैन ने साफ कहा कि पाकिस्तान को प्रचार फैलाने की बजाय अपने घर के हालात सुधारने चाहिए और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का सामना करना चाहिए। बैठक के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी पाकिस्तान के मानवाधिकार हनन पर सवाल उठाए। भू-राजनीतिक शोधकर्ता जॉश बोव्स ने बलूचिस्तान में कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया और बताया कि पाकिस्तान नाजुक समुदायों को दबाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिकता का ढोंग करता है। उन्होंने बताया कि यूएससीआईआरएफ (USCIRF) की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2025 के अनुसार पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के तहत 700 से अधिक लोग जेल में हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 300% अधिक है। बलूच नेशनल मूवमेंट की मानवाधिकार इकाई पांक के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में ही 785 जबरन गुमशुदगियां और 121 हत्याएं दर्ज की गईं। वहीं पश्तून राष्ट्रीय जिरगा का कहना है कि इस साल तकरीबन 4,000 पश्तून अब भी लापता हैं। पीओके में बिगड़ता हालात यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने परिषद से अपील की कि पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में दमन की बढ़ती घटनाओं पर हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। कान ने कहा कि पाकिस्तान ने रेंजर्स की तैनाती कर दी है और फोन व इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि संसाधनों के स्वामित्व और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे अहिंसक आंदोलन को दबाया जा सके। इससे पहले जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार को आगाह किया था कि वह अल्पसंख्यकों (विशेषकर अहमदी समुदाय) के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां और पूजा स्थलों पर हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।  

ट्रंप का नोबेल सपना अधूरा रह जाएगा? जानें क्या कहती हैं संभावनाएं, 8 दिनों में होगा ऐलान

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वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति खुलकर जाहिर कर चुके हैं कि वह नोबेल पुरस्कार चाहते हैं। हालांकि, इसकी संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि उन लोगों के पुरस्कार जीतने की संभावनाएं ज्यादा हैं, जो सुर्खियों से दूर हैं और भुला दिए गए मुद्दों पर काम कर रहे हैं। खास बात है कि ट्रंप ने उन्हें नोबेल पुरस्कार दिए जाने के तार अमेरिका के सम्मान से जोड़े हैं। 10 अक्तूबर शुक्रवार को पुरस्कारों की घोषणा की जानी है। एएफपी के अनुसार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के कुछ जानकार बताते हैं कि अमेरिका फर्स्ट की नीति और विभाजनकारी तरीकों के चलते उन्हें पुरस्कार मिलने की संभावनाएं नहीं हैं। इतिहासकार ओविंद स्टीनर्सन ने कहा कि ट्रंप कई मायनों में उन आदर्शों के खिलाफ काम करते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व नोबेल प्राइज करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने 6 या 7 युद्ध खत्म कराए हैं। जबकि, जानकारों की राय इससे अलग है। SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख करीम हैगाग ने कहा, 'नोबेल कमेटी आकलन करेगी कि शांति स्थापित करने में सफलता हासिल करने के स्पष्ट उदाहरण हैं या नहीं।' कहा जा रहा है कि नोबेल पीस प्राइज के लिए उम्मीदवारी जताने के लिए हजारों पात्र लोग हैं। ट्रंप ने अमेरिका के सम्मान से जोड़े तार ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है तो उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लिया है। ट्रंप ने कहा, 'यह शानदार है। कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, ‘क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?’ बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वे इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है… जी हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा। लेकिन देखते हैं क्या होता है।' उन्होंने कहा, 'यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी। मैं आपको बता दूं कि मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि यह देश को मिले। यह सम्मान देश को मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। इस बारे में सोचिएगा जरूर। मुझे लगता है कि यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) सफल होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं समझौतों के बारे में किसी से भी ज्यादा जानता हूं।' उन्होंने कहा, 'लेकिन, आठ समझौते करना वाकई सम्मान की बात है।'  

मोहन भागवत ने पहलगाम घटना से दी सीख: मित्र-शत्रु की पहचान अनिवार्य

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नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 100 साल का हो चुका है। अपने स्थापना दिवस (विजयादशमी) पर आज नागपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। वहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें यह सिखा गई कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन। आपको बता दें कि शस्त्र पूजा के साथ इस उत्सव की शुरुआत हुई। मोहन भागवत ने कहा, ''22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आए आतंकवादियों ने 26 भारतीय नागरिक पर्यटकों की हिंदू धर्म के बारे में पूछकर हत्या कर दी। इस हमले से पूरे भारत में शोक, उदासी और आक्रोश की लहर दौड़ गई। भारत सरकार ने एक सुनियोजित योजना के तहत मई माह में इस हमले का माकूल जवाब दिया। इस पूरी अवधि के दौरान, हमने देश के नेतृत्व की दृढ़ता, हमारी सशस्त्र सेनाओं की वीरता और युद्ध-तत्परता तथा हमारे समाज के दृढ़ संकल्प और एकता के हृदयस्पर्शी दृश्य देखे।'' मोहन भागवत ने आगे कहा, 'यह घटना हमें यह भी सिखा गई कि हम भले ही सबके प्रति मित्र भाव रखें, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना होगा। इस पूरी घटना के बाद हमने दुनिया के कई देशों का स्टैंड देखा। इस घटना ने हमें यह भी सीख दी कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन।'' आरएसएस मुख्यालय के रेशमबाग मैदान में शस्त्र पूजा के दौरान पारंपरिक हथियारों के अलावा ‘पिनाक एमके-1’, ‘पिनाक एन्हांस’ और ‘पिनाक’ सहित आधुनिक हथियारों की प्रतिकृतियां तथा ड्रोन प्रदर्शित किए गए। इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है।  

गांधी जयंती पर राजघाट पहुँचे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, देशवासियों से बापू के मार्ग पर चलने की अपील

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नई दिल्ली। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत तमाम नेता राजघाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी प्रतिमा को नमन किया और पुष्प अर्पित किए। बापू का रास्ता अपनाकर कर विकसित भारत का निर्माण करेंगे: पीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता के आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा को बदल दिया और आज भी भारत के विकास की दिशा तय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि गांधीजी ने दिखाया कि साहस और सादगी बड़े बदलाव के उपकरण बन सकते हैं। उन्होंने सेवा और करुणा की शक्ति में विश्वास रखा, जो लोगों को सशक्त बनाने का मूल आधार है। उन्होंने कहा, गांधी जयंती प्यारे बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है, जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास का मार्ग बदल दिया। उन्होंने दिखाया कि साहस और सादगी कैसे बड़े बदलाव ला सकते हैं। वह सेवा और करुणा को लोगों को सशक्त बनाने के जरूरी माध्यम मानते थे। हम उनका रास्ता अपनाकर विकसित भारत के निर्माण की ओर बढ़ेंगे। दो अक्तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा और सत्याग्रह के प्रवर्तक थे। उनके विचारों ने लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गांधी स्मृति स्थल पर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। भारत की स्वतंत्रता के कुछ महीने बाद यह घटना हुई। उनका जीवन और बलिदान दुनियाभर में शांति और मानव गरिमा का प्रतीक बना हुआ है। सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण कर गांधी के सपनों को साकार करेंगे: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।  इससे पहले गांधी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, गांधी जयंती हम सभी के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों और जीवन मूल्यों के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करने का अवसर है। गांधीजी ने विश्व को शांति, सहिष्णुता और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत है। वह आजीवन अस्पृश्यता, निरक्षरता, नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से समाज के कमजोर से कमजोर व्यक्ति को संबल और शक्ति प्रदान की। राष्ट्रपति ने कहा, नैतिकता और सदाचार में उनका अटूट विश्वास था जिसका उन्होंने आजीवन पालन किया और जन समुदाय को भी उस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। एक स्वावलंबी, आत्मनिर्भर और शिक्षित भारत के निर्माण के लिए उन्होंने चरखा चलाकर आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। अपने आचरण एवं उपदेशों के माध्यम से वे सदैव श्रम की गरिमा को प्रतिष्ठित करते रहे। उनके जीवन-मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे। आइए, गांधी जयंती के इस शुभ अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि हम सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र के कल्याण और प्रगति के लिए समर्पित रहेंगे और एक स्वच्छ, समर्थ, सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण करके गांधी जी के सपनों को साकार करेंगे।

नागपुर में RSS का वार्षिक विजयादशमी समारोह, शस्त्र पूजन के साक्षी बने भागवत और पूर्व राष्ट्रपति कोविंद

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नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में नागपुर के ऐतिहासिक रेशिमबाग मैदान में आज विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम न केवल संघ की परंपरागत शस्त्र पूजा और मार्च का प्रतीक बना, बल्कि संगठन के शताब्दी वर्ष की शुरुआत का भी ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पूर्ण गणवेश में मंच पर नजर आए। सुबह करीब साढ़े सात बजे शुरू हुए इस समारोह में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने सबसे पहले शस्त्र पूजा की, जो धर्म की रक्षा और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसके बाद योग प्रदर्शन, प्रात्यक्षिक, नियुद्ध, घोष और प्रदक्षिणा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मैदान को गुंजायमान कर दिया। शताब्दी वर्ष के कारण इस बार कार्यक्रम की भव्यता में तीन गुना वृद्धि हुई, जिसमें पूर्ण गणवेश में 21,000 से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। यह संख्या पिछले वर्षों से कहीं अधिक थी। मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद बुधवार को ही नागपुर पहुंचे हैं। उन्होंने दीक्षाभूमि पर भी प्रार्थना की, जहां डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया था। कोविंद ने समारोह को संबोधित करते हुए संघ के योगदान की सराहना की और कहा कि यह आयोजन राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक मील का पत्थर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश भर में एक लाख से ज्यादा ‘हिंदू सम्मेलनों’ समेत कई कार्यक्रमों की योजना बनायी है। इसकी शुरुआत दो अक्टूबर को यहां संगठन के मुख्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वार्षिक विजयादशमी संबोधन से हो गई। केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की थी।  

स्वदेशी शक्ति बढ़ाने भारत का बड़ा कदम: 5th जनरेशन फाइटर जेट बनाने 7 कंपनियों ने जताई रुचि

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नई दिल्ली भारत ने अमेरिका, रूस और चीन की तरह अपना खुद का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बनाने के सपने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय को भारत के अगले पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास और निर्माण के लिए 7 भारतीय कंपनियों से बोलियां मिली हैं। यह विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम का हिस्सा होगा। L&T, HAL, Adani Defence, Tata Advanced Systems Ltd और Kalyani Strategic Systems जैसी बड़ी कंपनियां इसमें शामिल हैं। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अनुसंधान और विकास कार्यक्रम है। इसका मुख्य लक्ष्य 2030 के दशक के मध्य तक भारत का मुख्य हवाई मंच बनने वाले नए, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाना है। इन बोलियों की जांच पूर्व DRDO मिसाइल वैज्ञानिक ए. शिवथानु पिल्लई की अध्यक्षता वाली एक समिति करेगी। यह कार्यक्रम एक प्रतिस्पर्धी मॉडल पर आधारित है। इसमें घरेलू निजी कंपनियां और स्थापित सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं एक-दूसरे से मुकाबला करेंगी। कंपनियों को AMCA डिजाइन को अपनाने की तकनीकी क्षमता और उत्पादन का पर्याप्त अनुभव दिखाना होगा। बोली लगाने वाली सात कंपनियों में से सरकार दो का चयन करेगी। इन कंपनियों को पांच मॉडल बनाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके बाद विमान बनाने के अधिकार दिए जाएंगे। क्या है प्लान? एएमसीए 2 लाख करोड़ रुपये की विनिर्माण परियोजना है, जिसके तहत 125 से अधिक लड़ाकू जेट विमान बनाए जाने हैं। इन विमानों के 2035 से पहले वायुसेना में शामिल होने के लिए तैयार होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, ऐसा होते ही भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों वाले देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। मई 2025 तक केवल संयुक्त राज्य अमेरिका (F-22 और F-35), चीन (J-20) और रूस (Su-57) के पास ही ये विमान हैं। एएमसीए क्या है? भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एकल सीट वाला दो इंजन वाला जेट होगा, जिसमें उन्नत स्टील्थ कोटिंग्स और आंतरिक हथियार कक्ष होंगे, जैसे कि अमेरिकी और रूसी विमानों एफ-22, एफ-35 और एसयू-57 में होते हैं। इसकी परिचालन क्षमता 55,000 फीट होने की उम्मीद है और यह आंतरिक हिस्सों में 1,500 किलोग्राम हथियार और बाहरी हिस्सों में 5,500 किलोग्राम अतिरिक्त हथियार ले जा सकेगा। एएमसीए संभवतः 6,500 किलोग्राम अतिरिक्त ईंधन ले जा सकेगा। दूसरे वर्जन में लगेगा देसी इंजन रिपोर्ट से पता चलता है कि इसके दो संस्करण होंगे। भारत को उम्मीद है कि दूसरे संस्करण में स्वदेशी रूप से विकसित इंजन होगा, जो संभवतः पहले संस्करण में लगे अमेरिकी निर्मित GE F414 से अधिक शक्तिशाली होगा। यह एक बेहद कुशलऔर गुप्त बहुउद्देशीय लड़ाकू जेट होगा। इसमें 21वीं सदी में विकसित प्रमुख तकनीक को शामिल किया गया जाएगा। यह परिचालन में सबसे आधुनिक लड़ाकू जेट हैं। इसमें बेहतर युद्धक्षेत्र सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है, जो पायलट को युद्ध क्षेत्र और दुश्मन लड़ाकों के बारे में विस्तृत जानकारी देता है, साथ ही उन्हें बढ़त दिलाने वाली हर चीज भी देता है। सेना को आधुनिक हथियार दे रहा भारत भारत अपने सैनिकों को आधुनिक हथियार देना चाहता है। इसी कड़ी में यह कदम उठाया गया है। भारत ने अप्रैल में फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमान का समुद्री संस्करण खरीदने के लिए 63,000 करोड़ रुपये का सौदा किया। 2031 तक आपूर्ति किए जाने वाले ये विमान पुराने रूसी मिग-29के की जगह लेंगे। वायु सेना पहले से ही 36 राफेल-सी लड़ाकू विमानों का संचालन कर रही है। पिछले एक दशक में भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित विमान वाहक पोत, युद्धपोत और पनडुब्बियां भी लॉन्च की हैं। इसके साथ ही लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण भी किया है। राजनाथ सिंह ने भारत में निर्मित हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने और निर्यात से राजस्व बढ़ाने के लिए 2033 तक कम से कम 100 बिलियन डॉलर के नए घरेलू सैन्य हार्डवेयर अनुबंधों का भी वादा किया है।

पूर्व राष्ट्रपति का खुलासा: दो डॉक्टरों ने संभाला जीवन, RSS में जाति के आधार पर भेदभाव की बात बेबुनियाद

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नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित सालाना दशहरा उत्सव में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि संघ में जातीय भेदभाव नहीं होता, जबकि देश में एक बड़े वर्ग में यह भ्रांति है कि यहां जातीय भेदभाव किया जाता है। नागपुर के ऐतिहासिक रेशमबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके जीवन में नागपुर की दो महान विभूतियों का अहम योगदान है। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी जिंदगी पर दो डॉक्टरों की अमिट छाप रही है। उनमें एक हैं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और दूसरे हैं डॉ. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर। उन्होंने कहा कि उनके जीवन निर्माण में इन दोनों महान विभूतियों का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक हैं, जबकि डॉ. आंबेडकर ने इस देश को समृद्ध संविधान दिया, जिसकी बदौलत वह एक आमजन होते हुए भी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंच सके। कोविंद ने कहा कि डॉ. आंबेडकर की चिंताएँ और विचार प्रक्रिया डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी ही थी। उन्होंने कहा कि जैसे आंबेडकर ने समाज के सभी वर्गों को जोड़ने पर जोर दिया था, उसी तरह संघ भी एकात्मता स्तोत्र के जरिए यही संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संघ की समावेशी दृष्टि इसका प्रमाण है। कोविंद ने आगे कहा कि हमारी इस एकता के आधार को बाबा साहब आंबेडकर ने inherent cultural unity (अंतर्निहित सांस्कृतिक एकता) कहा है। उन्होंने कहा कि हमें इसी सांस्कृतिक सामूहिक एकता की आधारशिला को कभी नहीं भूलना चाहिए। अटलजी को भी किया याद पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना के लिए सबसे शुभ और सार्थक दिन चुना। अपने संबोधन के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने डॉक्टर हेडगेवार से लेकर मोहन भागवत तक संघ के अब तक के सफर में सरसंघचालकों के योगदान भी गिनाए। अपने संबोधन के दौरान रामनाथ कोविंद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उद्धृत किया और एक सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी ने दलित विरोधी आरोपों पर स्पष्ट किया था कि हम मनुस्मृति के नहीं, बल्कि भीम स्मृति के अनुयायी हैं और यही भारत का संविधान है। भीम स्मृति से तात्पर्य संविधान से है, जिसका निर्माण बाबा साहब आंबेडर ने किया था। संघ से कब हुआ पहला परिचय? कोविंद ने अपने जीवन के उन पलों को भी याद किया जब संघ से उनका पहली बार परिचय हुआ था। उन्होंने कहा कि 1991 में वह कानपुर के घाटमपुर विधानसभा सीट से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे। तब वह भाजपा के उम्मीदवार थे। उसी समय चुनाव प्रचार के दौरान संघ के अधिकारियों और स्वयंसेवकों से उनका पहली बार परिचय हुआ था। कोविंद ने कहा कि संघ के लोगों ने जातिगत भेदभाव से रहित होकर उनका चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने दो टूक कहा कि संघ में जातीय आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता बल्कि संघ सामाजिक एकता का पक्षधर रहा है। कोविंद ने कहा कि उनकी जीवन यात्रा में स्वयंसेवकों के साथ जुड़ाव और मानवीय मूल्यों से बड़ी प्रेरणा मिली है और इसका उल्लेख उन्होंने अपनी आत्मकथा में किया है, जो इस साल के अंत तक प्रकाशित हो जाएगी।